राजस्थान में राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
राजस्थान में कुल 4 वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान है। केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित किया गया पशु पक्षियों का स्थल राष्ट्रीय उद्यान कहलाता है।
रणथम्बोर राष्ट्रीय उद्यान
- सवाईमाधोपुर जिले में स्थित इस अभयारण्य को 1 नवंबर,1980 को राज्य के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया।
- इस उद्यान को 1974 में बाघ परियोजना के अंतर्गत चयनित किया गया।
- यह देश की सबसे कम क्षेत्रफल वाली बाघ परियोजना है।
- यह उद्यान अरावली तथा विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य 392 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है।
- राष्ट्रीय स्मारक घोषित रणथंभौर दूर्ग इस उद्यान में स्थित है।
- इस उद्यान में बाघ, बघेरा, चीतल, सांभर, नीलगाय, रीछ, जरख एवं चिंकारा पाए जाते हैं।
- धौंक वृक्ष तथा ढाक वनस्पतियां इस उद्यान में पाई जाती है।
- आरक्षित क्षेत्र घोषित हो जाने पर रणथंभौर बाघ परियोजना को रामगढ़ (बूंदी) अभयारण्य से जोड़ दिया गया है।
- रणथंभौर उद्यान क्षेत्र में पदम तालाब, राजबाग, मलिक तालाब, गिलाई सागर, मानसरोवर एवं लाभपुर झीलें स्थित है।
केवलादेव (घना) राष्ट्रीय उद्यान
- एशिया में पक्षियों की सबसे बड़ी प्रणय (प्रजनन) स्थली, पक्षी प्रेमियों का तीर्थ, हिम पक्षियों का शीत बसेरा, पक्षियों का स्वर्ग आदि नामों से प्रसिद्ध यह उद्यान भारत के प्रमुख पर्यटन परिपथ ‘सुनहरा त्रिकोण’ (दिल्ली-आगरा-जयपुर) पर स्थित है।
- 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- सन् 1985 में 29 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैले इस उद्यान को यूनेस्को द्वारा विश्व प्राकृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया।
- यहां साइबेरियन क्रेन, दुर्लभ साइबेरियन सारस, गीज, पोयार्ड, लेपबिंग, बेगर्टल एवं रोजी पोलीकन नामक पक्षी पाए जाते हैं।
मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान
- 9 जनवरी, 2012 को इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- यह कोटा व चितौड़गढ़ में 199.55 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है।
- मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान का नाम दर्रा था। बाद में 2003 में इसका नाम राजीव गांधी नेशलन पार्क कर दिया गया।
- गागरोन दुर्ग, अबली मीणी महल, रावण महल, भीमचोरी मन्दिर इसी अभयारण्य में है।
- मुकुन्दरा हिल्स के शैलकियों आदि मानव द्वारा उकेरी गई रेखायें मिलती है।
रामगढ़ विषधारी अभयारण्य
- बूंदी जिले में स्थित यह अभयारण्य 252.79 वर्ग किमी. में फैला हुआ है।
- यहां धौकड़ा वृक्ष मुख्य रूप से पाए जाते हैं।
- बाघ परियोजना क्षेत्रों के अलावा राजस्थान में यह एकमात्र ऐसा अभयारण्य है जहां राष्ट्रीय पशु बाघ विचरण करते हैं।
- इस अभयारण्य को रणथंभौर के बाघों का जच्चा केन्द्र कहा जाता है।
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